लोक साहित्य, लोक प्रदर्शन कला तथा लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।

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रोहतक, 14 मार्च। लोक साहित्य, लोक प्रदर्शन कला तथा लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। लोक संस्कृति को जन-जन में जीवंत रखने के लिए सतत प्रयास की आवश्यकता है। ये विचार आज महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के सूर्यकवि पं लख्मी चंद शोध पीठ तथा छात्र कल्याण कार्यालय तथा स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफार्मिंग एण्ड विजुअल आर्ट्स द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रतिष्ठित विद्वानों तथा लोक संस्कृति विशेषज्ञों ने व्यक्त किए। एमडीयू के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया।
एमडीयू कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि लोक साहित्य तथा लोक गीत-संगीत का दस्तावेजीकरण जरूरी है ताकि ये विलुप्त न हो पाए। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों, विशेष रूप से विश्वविद्यालयों की लोक साहित्य तथा संस्कृति को प्रोत्साहन देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि हरियाणा में लोक साहित्य तथा लोक गीत-संगीत की प्राचीन परंपरा है। गांवों में बुजुर्ग महिलाएं अब भी लोक गीतों को गाती हैं, ऐसा उनका कहना था।
इससे पूर्व, एमडीयू के पं लख्मी चंद शोध पीठ के अध्यक्ष प्रो. जयवीर सिंह हुड्डा ने इस संगोष्ठी की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। प्रो. हुड्डा ने कहा कि इस संगोष्ठी के जरिए हरियाणा की लोक साहित्य तथा लोक प्रदर्शन कला के संरक्षण तथा प्रोत्साहन को नयी दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि एमडीयू तथा सुपवा इस दिशा में सार्थक प्रयास करेंगे।
संगोष्ठी में प्रतिष्ठित संस्कृति विशेषज्ञ प्रो. सुधीर शर्मा ने कहा कि लोक गीत-संगीत का आधुनिक युग में प्रस्तुतिकरण महत्त्वपूर्ण है। युवा पीढ़ी को लोक गीत-संगीत से जोडऩे के लिए विशेष तौर पर प्रस्तुतिकरण पर फोकस करना होगा। जीजीएसआईपीयू, नई दिल्ली के प्रोफेसर डा. अनूप सिंह बैनीवाल ने कहा कि जन मानस से कहने से लोक लोक नहीं रहता। जरूरी है लोक साहित्य, गीत-संगीत, प्रदर्शन कला को लोक से जोड़ा जाए। प्रतिष्ठित लोक साहित्य विद्वान प्रो. पूर्ण चंद शर्मा ने कहा कि लोक भाषा तथा बोली ज्यादा संप्रेषणीय है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में लोक साहित्य को शामिल किया जाना चाहिए।
लोक संस्कृति विशेषज्ञ डा. रामफल चहल ने कहा कि लोक संस्कृति के विविध आयाम मन, वचन तथा कर्म से मनुष्य को प्रभावित करते हैं। इस संदर्भ में आकाशवाणी की भूमिका की चर्चा डा. चहल ने की। निदेशक युवा कल्याण तथा लोक संस्कृति संवाहक डा. जगबीर राठी ने कहा कि हरियाणा के परफार्मिंग आर्टिस्टों को लोक संस्कृति के समृद्ध विरासत से रूबरू करवाना होगा। प्रतिष्ठित संगीतज्ञ तथा पूर्व निदेशक आकाशवाणी डा. कैलाश वर्मा ने कहा कि हरियाणा में हर अवसर, त्यौहार के अलग-अलग गीत हैं। इन गीतों का अपना माधुर्य होता है। प्रतिष्ठित थिएटर कलाकार डा. सतीश कश्यप ने कहा कि बदलते समय के साथ लोक गीत-संगीत तथा लोक थिएटर को समयानुकूल संशोधन करने होंगे। उन्होंने इस संदर्भ में उनके द्वारा निर्देशित सांग जानी चोर में किए गए प्रयोगों का उल्लेख किया। प्रतिष्ठित लोक गायक पे्रम देहाती तथा गुलाब सिंह ने लोक गायकी के अपने-अपने अनुभव सांझा किए। लोक संस्कृति विशेषज्ञ डा. रमाकांत शर्मा ने कहा कि हरियाणा के लोक गीतों में संस्कार समाहित रहे हैं। लोक गीतों का संरक्षण इन संस्कारों को बचाए रखने के लिए जरूरी है, ऐसा उनका कहना था। आकाशवाणी के पूर्व निदेशक धर्मपाल मलिक ने अपने आकाशवाणी के अनुभवों का हवाला देते हुए समृद्ध लोक साहित्य तथा गीत-संगीत के संरक्षण की चर्चा की।
विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. राजेश कुमार, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के सहायक प्रोफेसर सुनित मुखर्जी तथा जीजीएसआईपीयू के डा. नरेश वत्स ने भी अपने विचार सांझे किए।
इस अवसर पर प्रतिष्ठित लोक संस्कृति कर्मी जनार्दन शर्मा, रघुविन्द्र मलिक, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार, गणित विभागाध्यक्ष प्रो. जितेन्द्र सिक्का, एलुमनाई निदेशक प्रो. राजीव कुमार, प्रो. संजीव चाचड़ा, प्रो. सेवा सिंह दहिया, डा. कृष्णा देवी, सुपवा से डा. ज्ञानेन्द्र सिह, दुष्यंत तथा अन्य प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी, लोक संस्कृति कर्मी उपस्थित रहे।
रोहतक, 14 मार्च। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) का कॅरियर काउंसलिंग एंड प्लेसमेंट सेल 15 मार्च को विभागीय समन्वयकों की बैठक का आयोजन करेगा।
कॅरियर काउंसलिंग एंड प्लेसमेंट सेल के निदेशक प्रो. राजकुमार ने बताया कि यह बैठक 15 मार्च को दोहपर 1 बजे अंबेडकर हॉल में आयोजित की जाएगी।
रोहतक, 14 मार्च। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के सांख्यिकी विभाग के विद्यार्थियों का दल शैक्षणिक भ्रमण के लिए उत्तराखंड रवाना हुआ।
विभागाध्यक्ष प्रो. एस.सी. मलिक, डीन प्रो. प्रीति गुप्ता तथा प्रो. आरआर लक्ष्मी ने क्रांति चौक पर हरी झंडी दिखाकर इस दल को रवाना किया। विभागाध्यक्ष प्रो. एस.सी. मलिक ने बताया कि विभाग के रिसोर्स पर्सन डा. सतीश चौहान, शोधार्थियों समेत 42 विद्यार्थियों का दल इस चार दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण के दौरान उत्तराखंड के मैसूरी, टिहरी डैम तथा ऋषिकेश की विजिट करेगा और वहां रहने वाले लोगों की जीवनचर्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के बारे में अध्ययन करेगा। इस स्टडी के आधार पर दल में शामिल विद्यार्थी अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। विशेषज्ञों द्वारा इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी और प्रथम, दूसरे व तीसरे नंबर पर आने वाली रिपोर्ट वाले विद्यार्थियों को क्रमश: 2000 रूपए, 15000 रुपए तथा 1000 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी तथा इंडियन एसोसिएशन फॉर रिलायबिलिटी एंड स्टैटिस्टिक्स द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।

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