बायाइंफोर्मेटिक्स तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसमें शोध और कॅरियर की अपार संभावनाएं हैं।

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Attachmentsरोहतक, 14 मार्च। बायाइंफोर्मेटिक्स तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसमें शोध और कॅरियर की अपार संभावनाएं हैं। यह उद्गार महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के अधिष्ठाता, छात्र कल्याण प्रो. राजकुमार ने आज सेंटर फॉर बायोइंफोर्मेटिक्स में आयोजित-बायाइंफोर्मेटिक्स-ए साइंस ऑफ कंवर्जिंग टैक्नोलोजी विषयक राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ करते हुए व्यक्त किए।
प्रो. राजकुमार ने बतौर मुख्यातिथि इस राष्ट्रीय सेमिनार में शिरकत की। प्रो. राजकुमार ने कहा कि बायोइंफोर्मेटिक्स के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर विद्यार्थी सफलता की नई ऊंचाईयां प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने इस राष्ट्रीय सेमिनार के आयोजन के लिए सेंटर फॉर बायाइंफोर्मेटिक्स की निदेशिका प्रो. राजेश धनखड़ और उनकी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
डीन, लाइफ साइंसेज प्रो. पुष्पा दहिया ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की। अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रो. पुष्पा दहिया ने बायाइंफोर्मेटिक्स की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस राष्ट्रीय सेमिनार की कंवीनर तथा सेंटर फॉर बायोइंफोर्मेटिक्स की निदेशिका प्रो. राजेश धनखड़ ने स्वागत भाषण दिया। को-कंवीनर डा. अजीत कुमार ने कार्यक्रम का संचालन किया। आयोजन सचिव डा. महक डांगी ने सेमिनार की थीम पर प्रकाश डाला तथा कार्यक्रम का समन्वयन किया।
तकनीकी सत्रों में कंप्यूटर साइंस विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डा. नसीब सिंह गिल, भूगोल विभाग के प्रोफेसर डा. महताब सिंह तथा यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के वैज्ञानिक डा. योगेश अहलावत ने बतौर विशेषज्ञ विशेष व्याख्यान दिए। इस सेमिनार में पोस्टर मेकिंग, डेक्लामेशन तथा डांस कंपीटिशन का आयोजन किया गया। डेक्लोमेशन में माइक्रोबायोलोजी की समृथी ने प्रथम, यूआईईटी की श्वेता तंवर ने दूसरा तथा बॉटनी की ज्योति ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। पोस्टर मेकिंग में माइक्रोबायोलोजी की नेहा आंतिल ने प्रथम, यूआईईटी की सोनिया ने दूसरा तथा बायोइंफोर्मेटिक्स की पारूल शर्मा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। डांस में बॉटनी की अर्चिका ने प्रथम, बॉटनी की संजना व स्वीटी ने दूसरा तथा बायोइंफोर्मेटिक्स की कीर्ति ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
प्रो. पुष्पा दहिया, प्रो. विनिता हुड्डा, प्रो. मीनाक्षी वशिष्ठ, डा. सविता, डा. रेणु नांदल, डा. रचना, डा. केके शर्मा, डा. रीतू गिल, डा. समुंद्र ने इन प्रतियोगिताओं में निर्णायक मंडल की भूमिका का निर्वहन किया। आयोजन समिति सदस्य डा. एसएस गिल, डा. अमिता डंग, डा. पूजा सुनेजा, डा. दर्शना चौधरी तथा डा. रश्मि भारद्वाज ने आयोजन सहयोग दिया। इस राष्ट्रीय सेमिनार मेे लगभग 150 डेलीगेट्स ने भाग लिया।
रोहतक, 14 मार्च। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के कैमिस्ट्री विभाग में आज यूजीसी-सैप प्रोग्राम के तहत विस्तार व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रो. अली मोहम्मद ने बतौर अतिथि वक्ता-एनालिटकल टैक्नीक्स इन कैमिकल एनालिसस विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। प्रो. अली मोहम्मद ने क्रोमोटोग्राफी के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए तकनीक के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। विभागाध्यक्ष प्रो. एसपी खटकड़ ने अतिथि वक्ता का स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया। प्रो. खटकड़ ने आम जीवन में एनालिटकल टैक्नीक्स के महत्त्व को रेखांकित किया। यूजीसी-सैप प्रोग्राम कोआर्डिनेटर डा. वीबी तक्षक ने कहा कि इस तरह के व्याख्यानों से एडवांस्ड टीचिंग और रिसर्च को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने इस विशेष व्याख्यान के लिए प्रो. अली मोहम्मद का आभार जताया। इस अवसर पर प्राध्यापक प्रो. सपना गर्ग, डा. देवेन्द्र जाखड़, डा. प्रीति बूरा, डा. नवीन कुमार, डा. राजेश मलिक समेत विभाग के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। Attachments
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