पेटेंट का सृजन किसी भी दीर्घकालीन समस्या, किसी भी वैज्ञानिक या अन्य विषय विशेष की जरूरत को पूरा करने के लिए किया जाता है

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रोहतक, 11 फरवरी। पेटेंट का सृजन किसी भी दीर्घकालीन समस्या, किसी भी वैज्ञानिक या अन्य विषय विशेष की जरूरत को पूरा करने के लिए किया जाता है। पेटेंट के केन्द्र में वैज्ञानिक या पेटेंट कत्र्ता ही होता है। पेटेंट विकसित करने के लिए नवीनता तथा नवोन्मेष की विशेष जरूरत है। ये उद्गार प्रतिष्ठित प्रतिष्ठित बौद्धिक संपदा अधिकार विशेषज्ञ प्रो. उमेश बनाकर ने आज महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला में व्यक्त किए। सेंटर फॉर मेडिकल बायोटैक्नोलोजी तथा आईपीआर सैल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रो. उमेश बनाकर ने आईपीआर तथा वैज्ञानिक: आईपीआर में कॅरियर विषयक पर मुख्य व्याख्यान दिया।
प्रो. उमेश बनाकर ने बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) की मूलभूत अवधारणा तथा प्रक्रिया पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी वैज्ञानिक शोध को पेटेंट में परिवर्तित करने के लिए उसकी नवीनता तथा उसका नवोन्मेषी उपयोग को परखना जरूरी है। विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों की भविष्य में आईपीआर क्षेत्र में कॅरियर संभावनाओं की जानकारी प्रो. बनाकर ने दी। यूएसए में ख्याति प्राप्त प्रो. बनाकर ने यूएसए में पेटेंट संबंधित केस स्टडीज का उल्लेख अपने विद्वतपूर्ण व्याख्यान में किया।
इससे पूर्व, सेंटर फॉर मेडिकल बायोटैक्नोलोजी (सीएमबीटी) की निदेशिका तथा जीव विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. पुष्पा दहिया ने स्वागत भाषण दिया। प्रो. पुष्पा दहिया नेकहा कि वर्तमान में वैज्ञानिक परिदृश्य में बौद्धिक संपदा अधिकार का ज्ञान बेहद जरूरी है। विश्वविद्यालय के आईपीआर सैल के निदेशक प्रो. हरीश दूरेजा ने शोध में इन्नोवेटिव एप्रोच की वकालत की।
एमडीयू के डीन, एकेडमिक एफेयर्स प्रो. ए.के.राजन ने कहा कि भारत में पेटेंट फाइलिंग को एक वैज्ञानिक मुहिम बनाना होगा। उन्होंने शोध कत्र्ताओं से शोध नकल से बचने की सलाह दी। एमडीयू कुलसचिव तथा इंटर्नल क्वालिटी एस्युरेंस सैल के निदेशक प्रो. गुलशन तनेजा ने कहा कि बौद्धिक ईमानदारी बहुत जरूरी है। कुलसचिव प्रो. तनेजा ने ने बताया कि एमडीयू में प्रभावी आईपीआर नीति लागू की गई है।
इस कार्यशाला में दिल्लली विश्वविद्याय के फैकल्टी ऑफ लॉ के प्राध्यापक तथा निदेशक एन्त्रोप्रोनियरल लॉ क्लीनिक डा. अश्विनी सिवाल ने पेटेंट लॉ इन इंडिया तथा दिल्ली विवि के फैकल्टी ऑफ लॉ के लोंट सेंटर टू के इंचार्ज डा. वीके आहूजा ने पेटेंटस एण्ड पब्लिक हेल्थ पर व्याख्यान दिया। गोवा सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन इंटैलेक्चुअल प्रापर्टी-नरचरिंग एण्ड प्रोपैगेटिंग आईपी एवेयरनैस विषय पर गोवा कालेज ऑफ फार्मेसी, पणजी की एसोसिएट प्रोफेसर राजश्री गुडे ने व्याख्यान दिया। मंच संचालन प्राध्यापिका डा. रश्मि भारद्वाज ने किया। आभार प्रदर्शन प्राध्यापक डा. हरिमोहन तथा प्राध्यापिका डा. अमिता सुनेजा डांग ने किया।
इस कार्यशाला में डीन, कालेज डेवलपमेंट काउंसिल प्रो. युद्धवीर सिंह,निदेशक आईएचटीएम प्रो. आशीष दहिया, निदेशक सीबीटी प्रो. अनिल छिल्लर समेत विभिन्न शैक्षणिक विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी उपस्थित रहे। यूएसए से आए विशेषज्ञ प्रो. उमेश बनाकर ने कार्यशाला में प्रैक्टीकल सत्र में आईपीआर संबंधित बारीकियां तथा प्रक्रिया जनित जानाकरी सांझा की।

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