नेवी में लेफ्टीनेंट बना खरक पांडवा गांव का छौरा

सफलता के मुकाम को छूने पर ग्रामीणों ने संदीप सहारण का किया अभिनंदन
आजाद विधायक जयप्रकाश सहित विभिन्न संस्थाएं बधाई देने पहुंची सैनिक के घर

रणबीर धानियां,कलायत
5 जून


5 फीट 9 इंच कद, तना सीना, सिर पर पी-कप, कंधों पर बेहद आकर्षक रिंग और हष्ठ-पुष्ठ शरीर पर श्वेत पौशाक पहन युवा जब खरक पांडवा गांव में पहुंचा तो हर किसी को उनका परिचय जानने की जिज्ञासा थी। इनके साथ इसी गांव के भारतीय सेना अधिकारी सुखबीर सिंह सबका आदर सत्कार करते चल रहे थे। बाजवूद इसके कोई नहीं जान पा रहा था कि आखिरकार उनके साथ गांव में नेवी का कौन अधिकारी आया है? चौंक में पहुंचकर जैसे ही जवान ने बड़े-बुजुर्गों, महिलाओं के चरण स्पर्श कर बताया कि मैं रामशरण सहारण का पौत्र और इसी गांव का बेटा संदीप सहारण हूं तो हर किसी का सीना फखर से फूल गया। छोटी आयु में नेवी सेना में लेफ्टीनेंट पद पर नियुक्त होने की खबर सुनते ही उनके घर आंगन में भारी भीड़ जमा हो गई। हर कोई नव नियुक्त नेवी अधिकारी से मिलने और सम्मानित करने का आतुर था। सर्व जातीय सहारण खाप की ओर से उन्हें रामपाल सहारण, मास्टर राय सिंह कौलेखां, गुरनाम सिंह और दूसरे बड़े-बुजुर्गों ने सम्मान से नवाजा। इस कड़ी में आजाद विधायक जयप्रकाश भी सैनिक के घर पहुंच और उन्हें कामयाबी पर बधाई दी। संदीप सहारण के पिता भारतीय सेना अधिकारी सुखबीर सिंह ने बताया कि 27 मई को नेवी का परिणाम घोषित हुआ है। उसमें हरियाणा प्रदेश से 7 युवाओं का चयन हुआ है। इनमें एक संदीप सहारण भी है। नव नियुक्त लेफ्टीनेंट ने बताया कि बचपन से ही पिता के साथ सेना माहौल में रखने का अवसर मिला। उस दौरान मां कमला ने जहां सामाजिक सद्गुणों का पाठ पढ़ाया वहीं पिता की सेना के प्रति कर्तव्य निष्ठा ने उनमें इस क्षेत्र में जाने का जज्बा पैदा किया। वर्ष 1999 में पहली जमात में प्रवेश लेने वाले संदीप ने देश के विभिन्न हिस्सों में पढऩे-लिखने का अवसर मिला। वे बताते हैं कि उनका पहले मकसद अन्य क्षेत्र में सेवा देना था। लेकिन बचपन से ही जिस सैन्य माहौल में वे पले-बढ़े उससे स्वयं को अलग नहीं कर पा रहे थे। फलस्वरूप पिता के मार्ग दर्शन में नेवी में जाने की ठानकर वे इस डगर पर चल पड़े।
पिता बोले आर यू ओके?


संदीप सहारण ने बताया कि जैसे ही मुझे मेरे चयन की जानकारी मिली तुरंत परिवार से संपर्क किया। पिता ने उन्हें बधाई देने की बजाए जब आर यू ओके पूछा तो वे कुछ समझ नहीं पाए? उपरांत उन्होंने बताया कि अकसर बड़ी सफलता मिलने पर हर्ष से आंखें भर आती हैं। इसी उन्होंने उत्साह वर्धन से पहले कुशलक्षेम पूछा।
संदीप केवल मेरा नहीं सही मायने में देश का बेटा:
बेटे के चयन पर मां कमला भी फूली नहीं समां रही हैं। उनका कहना है कि नेवी में महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त हुए संदीप को भले मैंने अपने आंचल की छाया में पाला। लेकिन अब वह केवल मेरा नहीं बल्कि भारत माता का सपूत है। उन्होंने बेटे को निष्ठाभाव से कर्तव्य पालन के लिए प्रेरित किया।

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