इन्वोवेशन तथा इन्नोवेटिव शोध को समाज एवं मानव कल्याण के लिए उपयोग में लाना समय की जरूरत

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रोहतक, 9 फरवरी। इन्वोवेशन तथा इन्नोवेटिव शोध को समाज एवं मानव कल्याण के लिए उपयोग में लाना समय की जरूरत है। इन्नोवेशन (नवोन्मेष) संपोषणीय विकास का पूरक बने, ऐसा प्रयास किया जाना चाहिए। इस संबंध में शिक्षकों तथा शोधकत्र्ताओं की महत्त्वपूर्ण भ्ूामिका है। ये उद्गार महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (मदवि) के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने आज इन्नोवेशन एण्ड रिसर्च मैथोडोलोजी विषयक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किए।
मदवि कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि इन्नोवेशन समाजापयोगी बदलाव की प्रक्रिया है। समाज में व्यापक प्रौद्योगिकी-संबंधित, संगठन-संबंधित तथा व्यवहार संबंधित बदलाव हो रहे है। इन बदलावों की वजह से समस्याएँ भी सामने आ रही है। जरूरत है कि नवोन्मेषी शोध के जरिए समस्याओं का समाधान खोजा जाए। कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने विशेष रूप से डिफ्यूजन ऑफ इन्नोवेशन पर जोर दिया। कुलपति प्रो. राजबीर सिंह को इस सम-सामयिक विषय पर एफडीपी आयोजन पर फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर को बधाई दी।
इस कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी के कुलसचिव डा. जितेन्द्र भारद्वाज ने कहा कि शोध सत्य की खोज है। डा. भारद्वाज ने कहा कि भारत में प्राचीन समय से ज्ञान की परंपरा जीवंत रही है। उन्होंने कहा कि समाज को शिक्षकों से बहुत ज्यादा अपेक्षाएं हैं। ऐसे में शिक्षक समाज अपने ज्ञान एवं शोध का उपयोग समाज की विविध समस्याओं के निवारण के लिए करें। डा. भारद्वाज ने इस एफडीपी को ज्ञान-यज्ञ की संज्ञा दी। डा. जितेन्द्र भारद्वाज ने प्रतिष्ठित आध्यात्मिक गुरू रामकृष्ण परमहंस के गुरू महाराज तोतापुरी के उदाहरण से सत्त ज्ञान अर्जन की महिमा समझाई।
इससे पूर्व, एमडीयू के डीन, एकेडमिक एफेयरस तथा निदेशक, एफडीसी प्रो. ए. के. राजन ने स्वागत भाषण दिया। प्रो. राजन ने कहा कि गुणात्मक शोध प्राध्यापकों तथा शोद्यार्थियों की प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रो. राजन ने कहा कि प्राब्लम साल्विंग एटीटयूड के साथ इन्नोवेटिव रिसर्च की जा सकती है। फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर (एफडीसी) की उपनिदेशिका डा. माधुरी हुड्डा ने इस दस दिवसीय एफडीपी के थीम पर प्रकाश डाला। डा. माधुरी हुड्डा ने कहा कि इस एफडीपी के जरिए रिसर्च इको-सिस्टम विकसित करने का प्रयास किया जा रहा ह।
इस एफडीपी के उद्घाटन सत्र में अंग्रेजी विभाग की सहायक प्रोफेसर कविता ने मंच संचालन किया। इमसॉर की सहायक प्रोफेसर डा सपना ने आभार प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर डीन, फैकल्टी ऑफ एजुकेशन प्रो. भगत सिंह, निदेशक (आईपीआर) प्रो. हरीश दुरेजा, प्रो. हरीश कुमार, विभागाध्यक्ष (पत्रकारिता एवं जनसंचार), प्रो. संजू नंदा (विभागाध्यक्ष, फार्मेसी), प्रो. सोनिया मलिक (निदेशक, यूसीएस), सुनित मुखर्जी (निदेशक, जन संपर्क), आयोजन समिति के सदस्य गण- डा. संजीव कुमार, डा. ईश्वर मित्तल, डा. कपिल मल्होत्रा, समेत विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकगण, तथा एफडीपी के प्रतिभागी उपस्थित रहे। यह एफडीपी 18 फरवरी तक जारी रहेगा।

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