आर्य समाज के लोगों ने कराया हवन व सत्संग

गोहाना:नवीन कुमार
 गुरुकुल कालवा के आचार्य राजेंद्र ने कहा कि भौतिकतावाद समाज में आ रहे
बिखराव का मूल कारण है। भौतिकतावाद के चलते बच्चे और युवा पीढ़ी संस्कार
भूलते जा रहे हैं। अगर समाज को बिखरने से बचाना है तब हमें अपने बच्चों
को संस्कारवान बनाना होगा। वे रविवार को शहर में विष्णु नगर में आयोजित
सत्संग में श्रद्धालुओं को प्रवचन दे रहे थे। सत्संग से पहले चतुर्वेद
शतकम यज्ञ करवाया गया, जिसमें मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सलाहकार डॉ.
योगेश्वर मलिक और उनकी धर्मपत्नी डॉ. कल्पना ने मुख्य रूप से आहुति डाली।
 आचार्य राजेंद्र ने कहा कि जिनमें हमें जन्म दिया और सृष्टि को रचना
उन्हें कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देव का अर्थ देने वाले
हैं। इस दुनिया में माता-पिता, सूर्य, वायु, चंद्रमा सही मायने में देव
हैं। माता-पिता हमें पूरे जीवन कुछ न कुछ देते ही रहते हैं। वे जब तक
जीवित हैं, जितनी हो सकते अधिक से अधिक उनकी सेवा करें। उन्होंने कहा कि
यह विडंबना है कि लोग देने वालों की पूजा करनी छोड़ स्वार्थवश लेने वालों
की पूजा करने में अधिक विश्वास करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा
ने मनुष्य को ही कर्म करने की शक्ति दी है। आप समाज व राष्ट्र की भलाई के
लिए कर्म करते रहें, फल की चिंता मत करें। जिस कर्म में स्वार्थ नहीं
होता है निसंदेह एक दिन उसके परिणाम सकारात्मक ही आएंगे। उन्होंने वेदों
की उपयोगिता भी समझाई। कार्यक्रम का संयोजन आर्य समाज की गोहाना इकाई के
पूर्व अध्यक्ष सेवानिवृत्त प्राचार्य बलगानन मलिक व सुदेश मलिक ने किया,
जिसमें डॉ. पुष्पेंद्र और डॉ. छवि का सहयोग रहा। इस मौके पर अश्विनी
खासा, शशि मंगल, धर्मपाल भनवाला, राजेश आहुलाना, बलदेव खरब, रविंद्र
मलिक, सुनील भावा आदि मौजूद रहे।

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